यह रही मां पर एक और बेहद इमोशनल कविता, जो दिल के सबसे कोमल तारों को छू जाएगी –
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🌧️ “मां का आंचल”
रात के अंधेरे में जब डर लगता था,
तो मां की गोद में ही तो
सारा डर मिट जाता था।
भूख लगे या बुखार आए,
तेरी ममता ने कभी चैन से सोने नहीं दिया,
तेरी दुआओं ने ही तो
मौत के मुंह से वापस खींच लिया।
मां…
तूने कितनी बार खुद के अरमानों को
मेरे सपनों पर कुर्बान कर दिया,
तेरे भी तो कुछ ख्वाब होंगे,
जो तूने मेरी हंसी के लिए छोड़ दिए।
तेरी झुर्रियों में छुपा है,
तेरा हर संघर्ष, हर बलिदान,
तेरे कमजोर होते हाथों में
आज भी उतनी ही ताकत है,
जितनी मेरे बचपन में थी।
मां…
काश एक दिन ऐसा आए,
कि मैं भी तुझे वो सब दे सकूं,
जिसकी तुझे जिंदगी भर कमी रही,
क्योंकि तेरा कर्ज, तेरी ममता,
कभी चुका नहीं पाऊंगा।
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यह रही मां पर एक दिल छू लेने वाली कविता, जो उसके त्याग, प्यार और शक्ति को समर्पित है –
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🌸 “मां”
मां…
तेरा नाम लेते ही,
दिल को एक सुकून सा मिलता है,
जैसे हर दर्द, हर डर
तेरे आंचल में छुप जाता है।
तूने कभी अपने लिए कुछ मांगा नहीं,
बस हमारी खुशियों में ही
अपनी जिंदगी ढूंढ़ ली,
तेरे बिना ये घर भी घर नहीं,
तू है तो हर चीज में रौशनी सी है।
तेरी ममता के आगे,
भगवान भी झुक जाते हैं,
तेरी दुआओं के आगे,
मुसीबतें भी हार जाती हैं।
तू थक कर भी मुस्कुराती रही,
गिर कर भी संभालती रही,
हमारे हर सपने को पूरा करने के लिए,
तू खुद से भी लड़ती रही।
मां…
तेरे बिना कुछ भी नहीं,
तू है तो ये जहां है,
तेरा होना ही मेरी सबसे बड़ी दौलत है,
तेरी गोद ही मेरी सबसे बड़ी जन्नत है।
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